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इन दिनों असहिष्णुतावादीओं की हो गई है नींद हराम

Posted On: 7 Dec, 2015 Others,Politics,Others में

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हम भारतियों को पछताने मे बडा मज़ा आता है…कभी वेदो से.कभी मुगलो से.कभी अन्ग्रेजो से.कभी कान्ग्रेस से.और आज वीजेपी से.और दिल्ली बिहार चुनाव परिणाम के मद्देनजर..कल फ़िर शान से वीजेपी को खोकर कान्ग्रेस से पछतायेन्गे.
भारतीय वसुधैव कुटुम्बकम् की नीति को मानने वाले जिनके पूर्वज युद्ध भी नियमों से किया करते थे सूर्यास्त के बाद शत्रु चाहे बगल में भी हो उसका वध नहीं करते थे निहत्थे पे वार नहीं करते थे. हमारी इन्हीं अच्छाइयों के कारण हम पराजित हुए क्योंकि हम युद्ध में भी “सहिष्णु” थे जिसका परिणाम आज ये है कि लोग हमें “असहिष्णु” कह पा रहे है.
एक व्यक्ति ने एक पुस्तक लिखी, पुस्तक का नाम था “तैरने के 1000 तरीके” पुस्तक बहुत प्रसिद्ध हो गई और उसकी बिक्री ने सभी कीर्तिमान तोड़ दिये. एक संस्था ने निर्णय किया कि एक कार्यक्रम आयोजित करके इस पुस्तक के लेखक को सम्मानित किया जाये एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया और उस समारोह में उस लेखक को सम्मानित किया गया कार्यक्रम में लेखक का भाषण सुन कर लोग मंत्रमुग्ध हो ही रहे थे कि किसी ने लेखक से प्रश्न किया कि “मेरे विचार से आप तैरने के सारे तरीके तो जानते ही होंगे जो आपने अपनी पुस्तक में लिखें हैं, क्या आप बतायेंगे कि आपको ये तरीके सीखने में कितने वर्ष लगे” लेखक ने उत्तर दिया कि “मैं इनमें से एक भी तरीका नहीं जानता, बल्कि मैं तो तैरना ही नहीं जानता, हाँ तैरने के तरीकों के बारे में ज़रूर जानता हूँ
ठीक यही स्थिति हमारी भी है श्री नरेंद्र मोदी जी के पास समय बहुत है और तरीके भी उन्हो ने धर्म, राष्ट्र व् राजनीति की गहन तपस्या कर सिद्धि पाई है उन्हें यह बताने की आवश्कता नहीं कि किसे मंत्री बनाए या ना बनाए, वो चुनाव कैसे लडे जैसे द्वापर युग में कौरवो ने ‘श्री कृष्ण’ को सधारण मनुष्य समझने की भूल की थी, अभी बहुत से लोग ‘श्री नरेंद्र मोदी जी’ को केवल एक ‘सामान्य नेता’ समझने की भूल कर रहे है उसकी वास्तविक पहचान ये “असहिंष्णुता” का नाटक करने वाले बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि वो “दयालु” तो निश्चित रूप से नहीं है.
देश बहुत अधिक असहिष्णु हो गया है क्योंकि. . .
1) वर्तमान सरकार का नाम किसी घोटाले में नहीं आ रहा है | कोई घोटाला इन दिनों नहीं सुनाई दे रहा है | पता नहीं क्या हो गया है ?
2) कुछ “परिवारों” का भंडाफोड़ हो रहा है |
3) मिडिया बिकी हुई है, इसका पता सब को चल गया है |
4) हर युद्धविराम उल्लंघन के पश्चात पाकिस्तान वाले सफ़ेद झंडे फहराने पर बाध्य हैं |
5) पत्रकारों की मुफ्तखोरी और मुफ्त विदेश यात्राएं बंद हो गयी है |
6) फर्जी NGOs बंद कर दिए गए हैं |
7) अधकचरा बुद्धिजीवियों का पता चल गया है |
8) सरकारी कर्मचारी नियमानुसार कार्य करने को बाध्य किये जा रहे हैं |
9) सरकार विकास पर ध्यान दे रही है |
10) आतंकवादियों को बख्शा नहीं जा रहा है |
11) देश आर्थिक प्रगति के कगार पर है |
12) आज अगर दाल, सब्जी या फल महंगे है तो 68 वर्ष में आपने भांडागार (Ware House) क्यों नहीं बनाये ?
13) आज अगर किसान आत्महत्या कर रहा है तो 68 वर्ष में आपने किसान के खेत तक पानी क्यों नहीं पहुंचाया ?
14) आज अगर जवान देश की सीमा पर मारे जा रहे है तो 68 वर्ष में आपने देश की सीमा को सुरक्षित क्यों नहीं बनाया ?
15) अगर आज मोदी जी को निवेश के लिए पुरे विश्व का दौरा करना पड़ता है तो आप अभी तक विश्व को ये विश्वास क्यूँ नहीं दिला पाये की भारत एक उत्तम देश है निवेश के लिए ?
16) अगर आज भारत में बेरोजगार अधिक है तो आप ने 68 वर्ष तक युवा को नौकरी मिले इसके लिए क्या किया ?
17) मैं अपने ही देश में अपने तौर तरीके से क्यों नहीं रह सकता, मेरी पहचान छीनी जा रही है क्यों ?
18) अगर हम बहुसंख्यक हैं और हमारे बहुमत से चुनी हमारी सरकार हमारे ही कल्याण के लिए योजनाएँ क्यों नहीं बना सकती ?
19) क्यों मुझे हिंदुत्व की बात कहने के लिए भारतीयता का आवरण ओढ़ना पड़ता है ?
20) हम अपने धर्म की बात आखिर अपनी ही मातृभूमि पे क्यों नहीं कर सकते ?
इन सारे क्यों का उत्तर है एक क्योंकि हम “सहिष्णु” हैं |
अनावश्यक सुविधा जब सहिष्णुता की परिभाषा बन जाये तो उसका छिनना, कटना, समाप्त होना असहिष्णुता को जन्म देता है एक तरफ जहाँ पूरे विश्व में भारत की साख बढ़ रही है जिसे समाप्त करने को बिकी हुई मीडिया तुली हुई है वह पूरे देश और समाज को असहिष्णु बता कर राष्ट्र का अपमान कर रही है पूरा भारत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के साथ है और उनके नेतृत्व में हम अपने सपनों का भारत बनायेंगे.

asahiहम भारतियों को पछताने मे बडा मज़ा आता है…कभी वेदो से.कभी मुगलो से.कभी अन्ग्रेजो से.कभी कान्ग्रेस से.और आज वीजेपी से.और दिल्ली बिहार चुनाव परिणाम के मद्देनजर..कल फ़िर शान से वीजेपी को खोकर कान्ग्रेस से पछतायेन्गे.

भारतीय वसुधैव कुटुम्बकम् की नीति को मानने वाले जिनके पूर्वज युद्ध भी नियमों से किया करते थे सूर्यास्त के बाद शत्रु चाहे बगल में भी हो उसका वध नहीं करते थे निहत्थे पे वार नहीं करते थे. हमारी इन्हीं अच्छाइयों के कारण हम पराजित हुए क्योंकि हम युद्ध में भी “सहिष्णु” थे जिसका परिणाम आज ये है कि लोग हमें “असहिष्णु” कह पा रहे है.

एक व्यक्ति ने एक पुस्तक लिखी, पुस्तक का नाम था “तैरने के 1000 तरीके” पुस्तक बहुत प्रसिद्ध हो गई और उसकी बिक्री ने सभी कीर्तिमान तोड़ दिये. एक संस्था ने निर्णय किया कि एक कार्यक्रम आयोजित करके इस पुस्तक के लेखक को सम्मानित किया जाये एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया और उस समारोह में उस लेखक को सम्मानित किया गया कार्यक्रम में लेखक का भाषण सुन कर लोग मंत्रमुग्ध हो ही रहे थे कि किसी ने लेखक से प्रश्न किया कि “मेरे विचार से आप तैरने के सारे तरीके तो जानते ही होंगे जो आपने अपनी पुस्तक में लिखें हैं, क्या आप बतायेंगे कि आपको ये तरीके सीखने में कितने वर्ष लगे” लेखक ने उत्तर दिया कि “मैं इनमें से एक भी तरीका नहीं जानता, बल्कि मैं तो तैरना ही नहीं जानता, हाँ तैरने के तरीकों के बारे में ज़रूर जानता हूँ

ठीक यही स्थिति हमारी भी है श्री नरेंद्र मोदी जी के पास समय बहुत है और तरीके भी उन्हो ने धर्म, राष्ट्र व् राजनीति की गहन तपस्या कर सिद्धि पाई है उन्हें यह बताने की आवश्कता नहीं कि किसे मंत्री बनाए या ना बनाए, वो चुनाव कैसे लडे जैसे द्वापर युग में कौरवो ने ‘श्री कृष्ण’ को सधारण मनुष्य समझने की भूल की थी, अभी बहुत से लोग ‘श्री नरेंद्र मोदी जी’ को केवल एक ‘सामान्य नेता’ समझने की भूल कर रहे है उसकी वास्तविक पहचान ये “असहिंष्णुता” का नाटक करने वाले बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि वो “दयालु” तो निश्चित रूप से नहीं है.

देश बहुत अधिक असहिष्णु हो गया है क्योंकि. . .

1) वर्तमान सरकार का नाम किसी घोटाले में नहीं आ रहा है | कोई घोटाला इन दिनों नहीं सुनाई दे रहा है | पता नहीं क्या हो गया है ?

2) कुछ “परिवारों” का भंडाफोड़ हो रहा है |

3) मिडिया बिकी हुई है, इसका पता सब को चल गया है |

4) हर युद्धविराम उल्लंघन के पश्चात पाकिस्तान वाले सफ़ेद झंडे फहराने पर बाध्य हैं |

5) पत्रकारों की मुफ्तखोरी और मुफ्त विदेश यात्राएं बंद हो गयी है |

6) फर्जी NGOs बंद कर दिए गए हैं |

7) अधकचरा बुद्धिजीवियों का पता चल गया है |

8) सरकारी कर्मचारी नियमानुसार कार्य करने को बाध्य किये जा रहे हैं |

9) सरकार विकास पर ध्यान दे रही है |

10) आतंकवादियों को बख्शा नहीं जा रहा है |

11) देश आर्थिक प्रगति के कगार पर है |

12) आज अगर दाल, सब्जी या फल महंगे है तो 68 वर्ष में आपने भांडागार (Ware House) क्यों नहीं बनाये ?

13) आज अगर किसान आत्महत्या कर रहा है तो 68 वर्ष में आपने किसान के खेत तक पानी क्यों नहीं पहुंचाया ?

14) आज अगर जवान देश की सीमा पर मारे जा रहे है तो 68 वर्ष में आपने देश की सीमा को सुरक्षित क्यों नहीं बनाया ?

15) अगर आज मोदी जी को निवेश के लिए पुरे विश्व का दौरा करना पड़ता है तो आप अभी तक विश्व को ये विश्वास क्यूँ नहीं दिला पाये की भारत एक उत्तम देश है निवेश के लिए ?

16) अगर आज भारत में बेरोजगार अधिक है तो आप ने 68 वर्ष तक युवा को नौकरी मिले इसके लिए क्या किया ?

17) मैं अपने ही देश में अपने तौर तरीके से क्यों नहीं रह सकता, मेरी पहचान छीनी जा रही है क्यों ?

18) अगर हम बहुसंख्यक हैं और हमारे बहुमत से चुनी हमारी सरकार हमारे ही कल्याण के लिए योजनाएँ क्यों नहीं बना सकती ?

19) क्यों मुझे हिंदुत्व की बात कहने के लिए भारतीयता का आवरण ओढ़ना पड़ता है ?

20) हम अपने धर्म की बात आखिर अपनी ही मातृभूमि पे क्यों नहीं कर सकते ?

इन सारे क्यों का उत्तर है एक क्योंकि हम “सहिष्णु” हैं |

अनावश्यक सुविधा जब सहिष्णुता की परिभाषा बन जाये तो उसका छिनना, कटना, समाप्त होना असहिष्णुता को जन्म देता है एक तरफ जहाँ पूरे विश्व में भारत की साख बढ़ रही है जिसे समाप्त करने को बिकी हुई मीडिया तुली हुई है वह पूरे देश और समाज को असहिष्णु बता कर राष्ट्र का अपमान कर रही है पूरा भारत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के साथ है और उनके नेतृत्व में सभी को अपने सपनों का भारत बनाने का संकल्प लेना चाहिए.

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vaidya surenderpal के द्वारा
December 9, 2015

बहुत सुन्दर और सारगर्भित आलेख ।

rameshagarwal के द्वारा
December 7, 2015

जय श्री राम आशीष जी बहुत अच्छा और सटीक लेख.हिन्दुओ की इसी सहिष्णुता और एकजुट न होने की वाकः से ये हालत है की अपने धर्म और भगवान् के नाम लेने से सम्प्रदाहिक कहा जाता जब्को मुसलमान और उनको तुष्टीकरण करने वालो को सेक्युलर कह कर इज्ज़त की जाती क्योंकि मुसलमान एकजुट रहते इसलिए उनकी सब सुनते और मज़े से रहते पर घूरते भी.हम लोग इसीलिये गुलाम हुए नहीं तो जिस समुदाय के पास इतना बढ़िया धर्म,ज्ञान,दिम्माग, और संस्कृति हो जो विश्वगुरु बन सकती है कोम आज मीडिया और सेक्युलर ब्रिगेड के हमले सहन करने पड़ते शर्म की बात है.

    Ashish Shukla के द्वारा
    December 7, 2015

    आदरणीय रमेश जी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद, असहिष्णुता की बहस में देश ऐसा खो गया है मानो इसके अलावा लोगों के पास और कुछ करने को रह ही नहीं गया है. जहा देखो वही बहस छिड़ी है.


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