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जीते तो ‘गुण्डागर्दी,’ हारे तो ‘बिजलीगर्दी’

Posted On: 29 May, 2014 Others,Politics,Others में

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imagesलोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारी सपा सरकार की हालत इस समय ‘खिसियानी बिल्ली खम्बा नोचे‘ जैसी हो गई है। मुलायम के कुनबे को छोड़ कर समूचे यूपी में 10 से 12 घण्टे की बिजली कटौती जारी है। इससे साफ जाहिर है ये अपनी सियासत सिर्फ सत्ता के लिये करते है। इन्हे जनता की सेवा से कोई मतलब नही है। जिस जनता ने इन्हे पूरे देश मे सम्मान और राजा बनाया उसी के साथ राजधर्म निभाने का ज्ञान भी इनमे नही रहा । बनारस में मदनमोहन मालवीय जी प्रतिमा को मोदी के छूने पर सपा कार्यकर्ताओं द्वारा उसका शुद्धिकरण की घटना को पूरा देश मिडिया पर देखा और इनकी कुण्ठित मानसिकता से रूबरू हुआ । उस घटना पर मोदी जी ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और जनता लोकसभा के परिणाम में इनके कर्मो के फल तक पहुंचा दिया ।

बलत्कार की घटना पर मामूली अपराध कह कर छोड़ देने की बात कहने वाले मुलायम की मानसिकता पर जनता का वोट उल्टा पड़ गया। आज वे अपनी कमियों को देखने की बजाय, जनता पर अपनी खीझ उतारने पर लगे है। अखिलेश यादव बिजली समस्या पर दो साल में समस्या का समाधान होने की बात कहते फिर रहे है। अर्थात इस बार विधानसभा चुनाव लेपटॉप तो अगला विधानसभा चुनाव में 24 घण्टे बिजली का मुद्दा लेकर आयेंगे ।

सपा सरकार बनने के बाद ये अपने कार्यकर्ताओं को बेलगाम छोड़ देते है। अखिलेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद मुलायम ने अपने कार्यकर्तो को कहा था ‘‘अब जितना कमाना है कमाओ और हमे भी प्रधानमंत्री बनाओ जैसे सपने दिखाने की बात कहने से जनता को बेवकूफ बनाना अब इतना आसान नही रह गया है, जितना नेताजी अभी तक समझते आये है।

आज देखा जाये तो अखिलेश की स्थिति भी राहुल गॉधी जैसी है जिनका निर्णय उनकी सरकार में देखने को नही मिलता है। जब बोलते है तो एैसा लगता है कि जैसे किसी ने पर्दें के पीछे से उन्हे नसीहत दे डाली हो कि जाओ एैसा बोल दो। और उनका बॉडीलैग्वेज भी उसी तरह का दिखता है।

कार्यकर्ता तो कार्यकर्ता पुलिस भी इनके शासन में गुण्डा बन जाती है – बदायूं में खेत पर गईं दो किशोरियों से छेड़खानी करने के बाद दरिंदों ने उन्हें अगवा कर लिया। मंगलवार की रात को उनकी गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गईं। हत्यारे उनकी लाशें गांव के बाहर बाग में एक पेड़ से लटका गए। जिसने ने भी यह खबर सुनी वह गुस्से से खौल उठा। इस जघन्य कृत्य में इलाके की चौकी के दो सिपाही भी शामिल थे। संवेदनहीनता की हद तो तब हो गई, जब छेड़खानी की शिकायत लेकर पहुंचे युवक को ही पुलिस ने पकड़ लिया। पुरुषों तो पुरुष महिलाएं भी हाथ में लाठियां लेकर लाशों के चारों तरफ घेरा बनाए खड़ी थीं। उन्हें लग रहा था कि जिस पुलिस के सिपाही रात को एकतरफा कार्रवाई कर चुके हैं वहां के अफसर तो लाशें भी गायब करने से नहीं चूकेंगे।

लेकिन एक बात तो तय हो गई है कि आज का जागरूक मतदाता देश में घटिया मानसिकता रखने वाले नेताओ को अच्छी तरह पहचान लिया है। इनके वोटर अब सिर्फ वे ही लोग रह गये है जो इस लोकसभा चुनावो मे मीडिया के गॉव गॉव सर्वे में देखने को मिले जो देहातीयो से यह प्रश्न किया जाता कि किसे वोट दोगो…..? तो वे कहते कि ‘‘हमारे सरपंच जिसको कहेगे उसी को वोट देंगे‘‘ इससे साफ जाहिर होता है कि ये वोट आज भी इन्ही नेताओं के है और आगे भी रहेंगे।



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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shivendra Mohan Singh के द्वारा
May 31, 2014

जंगल राज जिसे देखना हो वो ऊत पदेश चला जाए, जब राजा ही गलत बानी बोलेगा तो बाकि का क्या होगा ये सोचने वाली बात है, इनका अहंकार चरम पर पहुँच रहा है. विनाश निश्चित है.


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